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          शांति का आधार अस्त्र-बल
     The Force Behind Peace

भारत डायनामिक्स लिमिटेड


                                   भारत सरकार का उद्यम,रक्षा मंत्रालय,
                                   कंचनबाग,हैदराबाद,भारत-500058.
                                   टेली: +91-040-24587466/24587777 फैक्‍स: +91-040-24340464

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कंपनी परिदृश्‍य
1. भारत डायनामिक्स लिमिटेड की स्‍थापना देश में संचलित प्रक्षेपास्त्र प्रणाली के विनिर्माण का आधार-पीठ तैयार करने के उद्येश्य से वर्ष 1970 में की गई. इसके अस्तित्ववान होने में राष्ट्र की प्रौद्योगिकी क्षेत्र में आत्‍म-निर्भर बनने की भावी दृष्टि प्रतिबिंबित होती है. डी आर डी ओ तथा वांतरिक्ष उद्योगों के प्रतिभाशाली कुछ इंजीनियरों के समूह से संपोषित बीडीएल ने अपना कार्यारंभ फ्रेंच उत्‍पाद एसएस 11बी1 से किया. यह उत्‍पाद फ्रांस के एअरोस्‍पेशियल के साथ भारत सरकार के अनुबंध के तौर पर सामने आया. बीडीएल के तीन विनिर्माण इकाइयाँ है जो कंचनबाग, हैदराबाद, आंध्र प्रदेश, भानूर, मेदक, आंध्र प्रदेश तथा विशाखपट्टणम, आंध्र प्रदेश में स्थित हैं. इब्रहिमपट्टणम, रंगा रेड्डी जिला, आंध्र प्रदेश तथा अमरावती, महाराष्ट्र में दो नई इकाइयों की योजना बनाई गई है.
   
2. एस एस 11बी1 परियोजना के सफलता पूवर्क पूर्ण होने के बाद बीडीएल ने दूसरी पीढ़ी के एटीजीएम-फ्रांस की मिलान तथा रूस की कांकूर्स का उत्पादन आरंभ किया. ये परियोजनाएं मेसर्स एरोमिसाइल, फ्रान्स तथा मेसर्स केबीपी, तुला, रूस के तकनीकी सहयोग से अनुज्ञप्ति उत्पाद के रूप में लिये गये थे. इन उत्पादों ने भारतीय सेना के इंफैण्ट्री तथा मेकॅनाईज्ड बलों की विस्‍तृत आवश्‍यकताओं को पूर्ण किया. बीडीएल में चरणबद्ध प्रौद्योगिकी अन्‍तरण की उत्‍पादन प्रक्रिया के दौरान कंपनी का ध्‍यान देशीकरण पर केन्‍द्रित हुआ जिसके फलस्‍वरूप इसके इंजीनियरों को टैंकभेदी प्रक्षेपास्‍त्रों की प्रणाली अभियांत्रिकी (सिस्‍टम इंजीनियरींग) और इसके डिजाइन की गहराई से जानकारी हासिल करने का मौका मिला. इस प्रक्रिया के दौरान बीडीएल ने कई भारतीय औद्योगिक भागीदारों को देशीकरण के बाद विश्‍वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में विकसित कर तैयार करने की दृष्‍टि से चर्चा भी कीं.
   
3. राष्ट्र द्वारा समन्वित संचलित प्रक्षेपास्त्र विकास कार्यक्रम (IGMDP) के अंतर्गत देश में ही अत्‍याधुनिक एवं समकालीन प्रक्षेपास्‍त्र बनाने की पहल से बीडीएल को इस कार्यक्रम में प्रमुख उत्‍पाद अभिकरण के रूप में चुने जाने से क़रीब से जुड़ने का अवसर प्राप्‍त हुआ. इससे उन्‍नत विनिर्माण और कार्यक्रम प्रबंधन तथा कौशल को आत्‍मसात करने के भरपूर अवसर प्राप्‍त हुए. डी आर डी ओ द्वारा आई जी एम डी पी में अपनाये गये समांतर इंजीनियरिंग पद्धति की दृष्‍टि से बीडीएल को विश्‍वसनीय और भरोसेमंद सहयोगी समझा गया, परिणामस्‍वरूप भारत की पहली उत्‍कृष्‍ट प्रौद्योगिकी से लैस सतह से सतह पर मार करने वाली 'पृथ्‍वी' मिसाईल सेना में शामिल हो पायी.
   
4. भारतीय सेना बलों की रक्षा आवश्यकताओं की पूर्ति की उत्‍कट इच्‍छा ने बीडीएल को अंतर जल-शस्त्र प्रणाली तथा हवा से हवा में मार करने वाले प्रक्षेपास्त्र तथा सम्‍बद्ध उपकरण बनाने के क्षेत्र में डी आर डी ओ व इस क्षेत्र में विश्‍व के अग्रणी संस्‍थानों के सहयोग से जगह बनाने में सफलता प्राप्‍त हुई है. इस तरह आने वाले समय में बीडीएल तीनों सेनाओं की इसी तरह की आवश्‍यकताओं की पूर्ति करने में तत्‍पर रहेगा.
   
5. विनिर्माण अभिकरण की भूमिका निभाते-निभाते इस क्षेत्र में प्राप्‍त ज्ञान का भरपूर प्रयोग बीडीएल के विकास एवं अभियांत्रिकी (डी अण्‍ड ई) प्रभाग ने प्रयोगकर्ता के लिए मूल्‍यवर्द्धित सामान बनाने में किया है. इनमें से कुछ उत्‍पाद हैं:
   
6. बीडीएल को आकाश अस्त्र प्रणाली (ए डब्ल्यू एस) का अग्रणी एकीकर्ता होने का फक्र है. भारतीय थल सेना ने वर्ष 2011 के दौरान आकाश अस्त्र प्रणाली की आपूर्ति के लिए बीडीएल को रु. 14,180 करोड़ के कार्यादेश दिए हैं. 05 मई, 2015 को भारतीय थल सेना में आकाश अस्त्र प्रणाली का प्रवर्तन हुआ है. आकाश की उत्पादीकरण के साथ भारत, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की उत्पादन क्षमता रखने वाले विश्व के कुछ श्रेष्ठतम देशों की गिनती में पहुँच गया है.
   
7. संप्रति बीडीएल की तीन विनिर्माण इकाइयाँ हैं. पहली इकाई हैदराबाद के अपने निगम कार्यालय के साथ स्थित है, दूसरी मेदक जिला, तेलंगाना तथा तीसरी जो विशेष रूप से अंतरजलास्त्र के विनिर्माण के लिए है, विशाखपट्टणम, आंध्र प्रदेश में स्थित हैं.
   
8. विस्तार योजना के तहत बीडीएल दो और इकाइयों की स्थापना कर रहा है – एक महाराष्ट्र के अमरावती जिले में तथा दूसरी तेलंगाना राज्य के इब्रहिमपट्टणम में.
 
9.  अमरावती की अपनी इकाई में बीडीएल अत्यल्प दूरी वाली वायु रक्षा मिसाइल (विश्राड) के उत्पादन की योजना बना रहा है. यह इकाई लगभग 530 एकड में फैला हुई है.
 
10. कंपनी, अपनी इब्रहिमपट्टणम इकाई में सतह से हवा में मार करने वाले मिसाइल रक्षा परियोजना बना रही है. यह इकाई 630 एकड में फैली हुई. भविष्‍य की ज़रूरतों की पूर्ति को ध्‍यान में रखते हुए सैम, ए टी जी एम के लिए आवश्‍यक परीक्षण सुविधाएँ स्थापित की जा रही हैं.
 

11. कंपनी के अधिकतम उत्पाद एकल प्रयुक्त होने के कारण अत्यंत विश्वसनीयता की माँग करते है. इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उत्पाद के शुरुआती स्तर से लेकर अंतिम रूप देने तक गुणता सुनिश्चित करने पर बल देते हुए गुण्ता नीतियॉं बनाई गई हैं.

12. बीडीएल के मिलान प्रभाग एवं भानूर इकाई ए एस 9100सी वांतरिक्ष गुणता प्रबंधन प्रणाली प्रमाणपत्र से प्रमाणित हैं. अन्य सभी उत्पादन प्रभाग आई एस ओ 9001 : 2008 गुणता प्रबंधन प्रणाली से प्रमाणित हैं. मिलान प्रभाग के इलेक्ट्रॉनिक्स लैब तथा भानूर इकाई इलेक्ट्रॉनिक मापन उपकरण के लिए इलेक्ट्रो-टेकनिकल अधिव्यास के क्षेत्र में आई एस ओ / आई ई सी 17025 : 2005 (एन ए बी एल) प्रमाणन से अधिप्रमाणित हैं.

13.बीडीएल के तीनों इकाइयॉं यथा कंचनबाग, भानूर एवं विशाखापट्टणम आई एस ओ : 14001 : 2004 पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली से प्रमाणित हैं.  

14.मानव संसाधन का विकास भी कंपनी के मुख्य उद्देश्यों में से एक है. संगठन में सुव्यवस्थित आंतरिक प्रशिक्षण केंद्र है जहॉं अधिकारी एवं कर्मचारियों को उनकी प्रशिक्षण आवश्यकताओं के अनुरूप विस्तृत क्षेत्र में प्रशिक्षण दिया जाता है.  

15.बीडीएल लागत में कमी को प्राथमिकता देता है. लागत में कमी लाने के लिए कंपनी ने विभिन्न प्रकार के उपाय अपनाए हैं. इस प्रयास के परिणामस्वरूप उत्पादन लागत में कमी, उत्पादकता मानकों का निश्चयन, प्रबंधन प्रणाली का आधुनिकीकरण संभव हो पाया है.  

16.     बीडीएल मेंऔद्योगिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं पर्यावरण स्वच्छता का पालन सख़्ती से किया जाता है तथा सभी सांविधिक अनिवार्यताओं का अनुपालन किया जाता है. सुरक्षा पहलुओं के पुनरीक्षण एवं अनुवीक्षण के लिए नियमित अंतराल पर औद्योगिक सुरक्षा एवं विस्फोटक सुरक्षा समिति की बैठकें बुलाई जाती हैं. बीडीएल अपनी सभी इकाइयों में साफ-सुथरा एवं हरा-भरा पर्यावरण बनाए रखता है. साफ-सुथरे परिसर, हरा-भरा पर्यावरण, सख़्त प्रदूषण नियंत्रण उपाय, शून्य व्यर्थ निकासी, ऊर्जा संरक्षण, प्रणालीबद्ध प्रबंधन तथा हानिकारक एवं अन्य व्यर्थ का निपटान के साथ अन्य कई तरह के प्रयास सुव्यवस्थित पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली के हिस्से बन गए हैं.

17.    डॉ कृष्णा मेनन, डॉ राजा रामन्‍ना, एयर वाईस मार्शल दस्तूर जैसे प्रज्ञावान ज्ञाताओं व विभिन्न प्रतीभाशाली वैज्ञानिक तथा इंजीनियरों नेतृत्‍व में आगे बढ़े इस उद्यम की अध्‍यक्षता वर्तमान में श्री वी उदय भास्कर, सी एम डी कर रहे हैं.

 

18. प्रौद्योगिकीय उत्कृष्टता की खोज को संगठन का निर्देशक सूत्र बनाया गया है ताकि वह अपने उपनामकरण अनुसार शांति का आधार अस्त्र बल पर खरा उतर सके.